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मैट्रिक पास लड़के ने खड़ा कर दिया ₹8000 करोड़ का कंपनी, 58 साल पहले अपने भाई के नाम पर खोली थी पहली दुकान

58 साल पहले अपने भाई के नाम पर खोली थी पहली दुकान

हम आज बात कर रहे हैं Vijay Sales Owner की जिसके जेब में सिर्फ 2000 रुपये थे. हाथ में मैट्रिक पास की सर्टिफिकेट थी. न इंग्लिश आती थी और न ही बिजनेस का ABCD समझ में आता था, लेकिन उसके पास अगर कुछ था तो हार न मानने की ताकत. शुरुआत में घर-घर जाकर पंखे और सिलाई मशीन बेचता था. लोगों की जरूरतों को उसने करीब से देखा और उसी गैप को भांपकर एक ऐसी शुरुआत की, जिसने साइकिल पर सिलाई मशीन बेचने वाले को 8000 करोड़ रुपये का मालिक बना दिया.

10वीं पास आज 140 से ज्यादा स्टोर्स का मालिक हैं. हरियाणा के छोटे से गांव के रहने वाले इस शख्स मुंबई के माबिम इलाके में 40 फुट के एक छोटी सी दुकान से विजय सेल्स ( Vijay Sales) का विशाल साम्राज्य खड़ा कर दिया. आज हम आपको बता रहे हैं नानू गुप्ता ( Nanu Gupta) की कहानी, जिन्होंने सिर्फ 2000 रुपये की बदौलत 8000 करोड़ रुपये के वैल्यूएशन वाले विजय सेल्स की नींव रखी.

विजय सेल्स का मालिक कौन?

हरियाणा राज्य के नानू गुप्ता (Nanu Gupta) का परिवार खेती-बारी करता था. बहुत ही कम कमाई थी, इसलिए पढ़ाई पूरी नहीं हो पाई. वो समझ गए थे कि उन्हें घर से बाहर निकलना होगा, तभी वो परिवार की आर्थिक हालात को बदल पाएंगे.

इसी सोच को लेकर जेब में 2000 रुपये लेकर दसवीं पास नानू गुप्ता 1954 में मुंबई आ गए. उन्होंने साल 1967 में मुंबई के माहिम इलाके में एक छोटा सा दुकान किराए पर लिया. साइकिल पर सिलाई मशीन, रेडियो, पंखे लेकर गली-गली घूमकर दुकान का सामान बेचते थे.

अपने भाई के नाम पर रखा दुकान का नाम

नानू गुप्ता ने अपने भाई के नाम पर दुकान का नाम विजय सेल्स (Vijay Sales) रखा. लोगों के बीच जान-पहचान बढ़ाने के लिए वो खुद साइकिल पर छोटे-छोटे बिजली का सामान लेकर बेचने निकल जाते. गली-गली घूमकर सिलाई मशीन, पंखे, रेडियो बेचते. ऐसा करने वो न केवल सेल्स का हुनर सीख रहे थे, बल्कि लोगों के साथ रिश्ते बना रहे थे. लोगों को भरोसा जीतने और फिर उन्हें अपनी शॉप पर आने के लिए कहते. साल 1974 में उन्होंने अपनी दुकान में ब्लैक एंड व्हाइट टीवी (Black And White) बेचना शुरू किया. फिर कलर टीवी (Colour TV) का जमाना आया.

140 शहरों में विजय सेल्स का स्टोर

नानू गुप्ता की एक ही आदत थी, ग्राहकों को खुश करना.अगर किसी को सामान में दिक्कत आती नानू खुद ग्राहकों के घर पहुंच जाते और समस्या सुलझाते. उनकी ईमानदारी और सेवा ने लोगों का दिल जीत लिया. यही सब के बदौलत उन्होंने साल 2006-07 तक विजय सेल्स की 10 से ज्यादा शोरूम खोल लिए. पुणे, अहमदाबाद, सूरत और दिल्ली में स्टोर खोले . देशभर में विजय सेल्स के 140 से ज्यादा शोरूम खुल गए.

विजय सेल्स का सक्सेस मंत्र क्या है

आज के समय में विजय सेल्स में हजारों तरह के इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट मिलते है. विजय सेल्स की सफलता का मूल मंत्र विश्वास, ईमानदारी और ग्राहक सेवा. नानू गुप्ता ने तरक्की के लिए जल्दीबाजी नहीं दिखाई. उनका फॉर्मूला था, कभी बिज़नेस में जल्दी नहीं करनी है. भले ही धीमी लेकिन मजबूत बढ़त होनी चाहिए.

आज विजय सेल्स हर साल 4000 करोड़ रुपये से अधिक की सेल करता है. Vijay Sales का टारगेट साल 2025 तक इस सेल को दोगुना कर ₹8,000–₹10,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है. कंपनी का रेवेन्यू ₹11,000 करोड़ का है. इस कंपनी में 8 हजार से अधिक कर्मचारी हैं

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